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जी, डॉ. गोपाल, India

  • Vol 19, No 11 (2018): NOVEMBER 2018 - Articles
    सांस्कृतिक परम्परा की संवाहक वाराणसीकीतीर्थ यात्राओं का अध्ययन डॉ. गोपाल जी पूर्व शोध छात्र इतिहास विभाग, सामाजिक विज्ञान संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी-221005 वाराणसी की सांस्कृतिक परम्परा मे तीर्थ यात्रा एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में प्राचीन काल से ही मान्य रहा है। यहाँ के धार्मिक भूगोल पर दृष्टिपात करने से ज्ञात होता है कि जिस प्रकार समय-समय पर मंदिरों के महात्म्य परिवर्तित होतें रहें हैं, उसी प्रकार यहाँ की प्रचलित तीर्थ यात्राओं के मार्ग का क्रम भी बदलता रहा हैं। जनसंख्या के बढ़ते दवाब के फलस्वरूप अनेक नये-नये मुहल्लों का आवासीत होना एक प्रमुख कारक है। मानव अधिवास के घनत्व के कारण जहाँ तीर्थ यात्राओं के मार्ग बदलने पड़े वही मुसलमानों के आक्रमण एवं आधिपत्य ने अनेक कठिनाइयों को जन्म दिया। अतः मुसलमानों के शासन काल में विध्वंस और पुर्ननिर्माण की प्रक्रिया के फलस्वरूप वाराणसी में नित्य और नैमित्तिक यात्राओं में बदलाव बहुत अधिक हुआ। प्रस्तुत प्रपत्र वर्तमान में प्रचलित शास्त्रीय तीर्थ यात्राओं के सांगोपांग विवेचन पर आधारित है। 1. सुकुल कुबेरनाथ; वाराणसी वैभव, पृ0175 2. सुकुल कुबेरनाथ; वही, पृ0 178 3. काशीखण्ड; 100/76 4. काशीखण्ड; 74/45 5. काशीखण्ड; 100/76 6. सुकुल कुबेरनाथ : पूर्वोक्त, पृ. 179 7. वही, पृ. 180-812 8. सुकुल कुबेरनाथ; पूर्वोक्त ,पृ. 186-90 9. कूर्मपुराण; 1/30/4/5 10. काशीखण्ड; 100/44 11. काशीखण्ड; 73/76/84.74, 20; 44, 119-121 12. सुकुल; पूर्वोक्त, पृ0 187 13. सुकुल कुबेरनाथ, पूर्वोक्त, पृ. 193 14. कृत्यकल्पतरु : पृ. 122 15. काशीखण्ड; 100/49-50 16. काशीखण्ड; 100/63-64 17. लिंगपुराण कृ0क0त0, पृ0 121-122 18. काशीखण्ड; 73/32-35 19. काशीखण्ड; 73/60-61 20. सुकुल कुबेरनाथ : पूर्वोक्त, पृ0 196 21. वही, पृ0 197 22. वही, पृ0 200 23. डायन एल. एक्क 1982, वाराणसी सिटी ऑफ लाइट, पृ0 42, सिंह प्रतिभा, 2004, शिव काशी : पौराणिक प्ररिप्रेक्ष्य एवं वर्तमान सन्दर्भ, पृ0 91
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  • Vol 20, No 06 (2019): Vol. 20, No. 06, June 2019 - Articles
    पुराणों मे तीर्थ यात्रा का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
    Abstract